मेजर राजेश सिंह अधिकारी

मेजर राजेश अधिकारी: कारगिल का अमर योद्धा

राजेश सिंह अधिकारी भारतीय सेना में 18 ग्रिनेडियर यूनिट के मेजर के रूप में तैनात थे। 11 दिसंबर 1993 को मेजर अधिकारी ने देहरादून के इंडियन मिलिट्री अकादमी से पासआउट होकर भारतीय सेना में अपनी जिम्मेदारी संभाली।

कारगिल युद्ध

वर्ष 1999 में जब जम्मू और कश्मीर के कारगिल छेत्र में पाकिस्तानी सेना का समर्थन लिए उग्रवादियों ने अत्यधिक बल के साथ घुसपैठ शुरू करी तो यह एक बड़ी लड़ाई का कारण बनी। इसके बाद इन घुसपैठियों को बॉर्डर के उस पर भेजने के लिए भारतीय सेना को निर्देश जारी हुआ। इसके बाद भारतीय सेना के अलग- अलग दलों ने मोर्चा संभाला और अपने छेत्र का वापस अधिग्रहण करते गए।

ऑपरेशन विजय

कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों पर छिड़े इस युद्ध में जीत के लिए भारतीय सेना द्वारा अलग अलग यूनिटों के साथ मिलकर कई ऑपरेशन चलाए गए। जिसमें मेजर राजेश अधिकारी कि अगुवाई में ऑपरेशन विजय को दिया गया। ऑपरेशन विजय का मकसद तोलोलिंग की पहाड़ियों पर वापस विजय पाने का था। तोलोलिंग की यह पहाड़ियां लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर बर्फ से ढकी हुई थी जिसमें घुसपैठिए पहले से ही कब्जा किए बैठे थे और लगातार गोली और बम वर्षा कर रहे थे।

30 मई 1999 को ऑपरेशन विजय की शुरुवात हुई और इसी रात मेजर अधिकारी और उनकी 10 सदस्यीय ग्रेनेडियर टीम ने कुल्हाड़ियों की मदद से पहाड़ पर चढ़ाई शुरू कर दी। मेजर अधिकारी और उनकी टुकड़ी ने पहाड़ी पर चढ़ने के बाद कुछ पत्थरों के सहारे से दुश्मन की स्थिति का जायजा लिया और रॉकेट लांचर की मदद से हमला किया और दुश्मन के 2 सैनिकों को मार गिराया। इसके बाद दुश्मन चौकन्ने हो गए और टुकड़ी पर भारी हमले करने लगे। जिसके बाद टुकड़ी के कुछ सदस्य मेजर के आदेशानुसार पत्थरों की आड़ में दुश्मन की स्थिति का जायजा लेने लगे और बाकी टुकड़ी के जवानों ने हमला जारी रखा। इस भारी गोलीबारी के बीच मेजर अधिकारी को भी गोली लगने से गंभीर चोट आई लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी यूनिट को निर्देश देना जारी रखा। इसके बाद भारतीय सेना की इस टुकड़ी ने अपने कप्तान के निर्देश पर दुश्मन के एक के बाद सभी ठिकानों को नष्ट किया और तोलोलिंग के प्वाइंट 4590 पर अपना कब्जा किया। कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान होने वाले भारतीय सेना के वह दूसरे सैन्य अधिकारी थे। सर्वोच्च बलिदान के बाद उनका पार्थिव शरीर 13 दिन पश्चात युद्धक्षेत्र से लाया गया था। उनकी सैन्य वर्दी की जेब में ही पत्नी के तरफ से लिखी गई एक चिट्ठी भी मिली थी जिसे उनके द्वारा पढ़ा भी नहीं गया था।

मेजर राजेश अधिकारी का जीवन

मेजर राजेश सिंह अधिकारी का जन्म 25 दिसंबर 1975 को नैनीताल जिले में हुआ था। मेजर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा 1987 में सेंट जोसेफ कॉलेज से प्राप्त की इसके बाद नैनीताल राजकीय इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट और कुमाऊं यूनिवर्सिटी से 1982 में बीएससी की शिक्षा प्राप्त करी।

मेजर राजेश सिंह को 11 दिसंबर 1993 को देहरादून में स्थित भारतीय सैन्य अकादमी से कमीशन मिला। अकादमी से पास होने के बाद, वह भारतीय थल सेना की 2 मैकेनिकल इन्फैंट्री में शामिल हो गए। कारगिल युद्ध के समय वह भारतीय सेना के 18 ग्रेनेडियर्स में तैनात थे।