हरीश रावत
Uttarakhand Politician Harish Rawat

नाम हरीश रावत (Harish Rawat)
जन्मतिथि 27- अप्रैल- 1948
शिक्षा बैचलर इन आर्ट्स और एल•एल•बी
जन्मस्थान मोहनरी (अल्मोड़ा)


1980

  • वर्ष 1980 में हरदा (Harish Rawat) ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मुरली मनोहर जोशी को हराकर अल्मोड़ा लोकसभा सीट से जीत हासिल करी और 7वीं लोकसभा के सदस्य चुने गए।
  • 1984

  • इस वर्ष हरीश रावत ने एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मुरली मनोहर जोशी को हराया और अल्मोड़ा लोकसभा सीट से चुनाव जीते, और 8वीं लोकसभा के सदस्य बने।
  • 1989

  • वर्ष 1989 में लगातार तीसरी बार रावत ने अल्मोड़ा सीट से चुनाव लडा और जीता। इस वर्ष उन्होंने उत्तराखण्ड क्रांति दल के प्रत्याशी काशी सिंह अरे को हराया, तथा उत्तराखण्ड की ओर से 9वीं लोकसभा के सदस्य चुने गए।
  • 1990

  • वर्ष 1990 में हरीश रावत ने संचार मंत्री का कार्यभार संभाला।।
  • इसी वर्ष मार्च महीने में ही इन्होंने राजभाषा मंत्री के पद को भी संभाला।।
  • 1991

  • इस वर्ष रावत को भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी जीवन शर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
  • 1992

  • 1992 में इन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पदभार को संभाला, जिस पर यह1997 मनोनित रहे।
  • 1996

  • अगले चुनाव के दौरान भी रावत को भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी बच्ची सिंह रावत के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
  • 1998

  • इस वर्ष रावत को दूसरी बार बच्ची सिंह रावत के खिलाफ हार का मुंह देखना पड़ा।
  • 1999

  • अगले ही वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में हरीश रावत एक बार फिर अल्मोड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लडे लेकिन इस बार भी लगातार तीसरी बार (लगातार चार बार अलग-अलग प्रत्याशियों से) उन्हें बच्ची सिंह रावत से हार का सामना करना पड़ा।
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  • इसी वर्ष रावत को हाउस कमेटी का सदस्य भी नियुक्त किया गया।
  • 2002

  • वर्ष 2002 में हरीश रावत को कांग्रेस की तरफ से राज्य सभा का सदस्य चुना गया। हरीश रावत वर्ष 2008 तक राज्य सभा के सदस्य रहे।
  • 2009

  • वर्ष 2009 में हरीश रावत ने हरिद्वार लोकसभा सीट से चुनाव लडा और बीजेपी प्रत्याशी अजय भट्ट को शिकस्त दी।
  • 2014

  • वर्ष 2014 में हुए विधानसभा उप चुनाव में हरीश रावत ने धारचूला सीट से अपना नामांकन किया और बीजेपी प्रत्याशी विष्णु दत्त को चुनावी रण में पराजय किया।
  • 2017

  • इस वर्ष उत्तराखण्ड के विधानसभा चुनाव में रावत ने हरिद्वार रूरल और किच्छा सीट से अपना नामांकन भरा। इन दोनों ही सीटों पर रावत को हार का सामना करना पड़ा। हरिद्वार सीट पर बीजेपी प्रत्याशी यतीस्वरानंद और किच्छा सीट पर राजेश शुक्ला से हार का सामना करना पड़ा।
  • 2019

  • 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में हरीश रावत ने नैनीताल - उधम सिंह नगर सीट से अपना नामांकन किया लेकिन इस बार उन्हें बीजेपी प्रत्याशी अजय भट्ट के हाथों इस चुनावी रण में हार का सामना करना पड़ा।

  • जीवनी

    हरीश रावत उत्तराखण्ड की राजनीति में कद्दावर नेता हैं, जिनका जन्म 26- अप्रैल- 1948 को अल्मोड़ा जिले के छोटे से गांव मोहनरी में हिंदू राजपुत परिवार में हुआ था। हरीश रावत के पिता का नाम राजेंद्र सिंह रावत तथा माता का नाम देवकी देवी था।

    हरीश रावत उत्तराखंड की राजनीति में वह अहम नाम है जो अपने आप में ही अपनी साख को दर्शाते हैं। उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के सबसे अहम और सबसे वरिष्ठ चेहरा हैं हरीश रावत। रावत कांग्रेस पार्टी के लिए जितने अहम हैं, वह उतने ही उत्तराखंड की राजनीति के भी अहम किरदार हैं। रावत ने अपने राजनीतिक सफर में लाख कठिनाईयों के बाद भी केंद्र की सरकार में कैबिनेट मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री पद को संभाला है।

    शिक्षा

    हरीश रावत ने अपनी शिक्षा उत्तर प्रदेश से पूरी करी है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज चौनलिया में करी (वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य का हिस्सा)। इसके बाद हरीश रावत ने अपनी आगे की शिक्षा उत्तरप्रदेश में स्थित लखनऊ यूनिवर्सिटी से पूर्ण की। जहां उन्होंने बी•ए• और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की।

    हरीश रावत का शून्य से सफर

    अपनी राजनीति की शुरुआत रावत ने शून्य अर्थात ब्लॉक स्तर से चुनाव लडने से की है। इसके बाद हरीश रावत युवा कांग्रेस के दल के साथ जुड़ गए।

    छोटे छोटे चुनाव जीतने और हारने के बाद रावत के राजनीतिक करियर में बड़ा बदलाव वर्ष 1980 के दौरान आया जब उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी को अल्मोड़ा लोकसभा सीट से हराया और संसद में अपनी जगह बनाई। इसी वर्ष उन्हें श्रम एवम रोजगार राज्य मंत्री के रूप में भी नियुक्त किया गया। इसके बाद वर्ष1980 से 1989 तक उन्होंने लगातार तीन बार चुनाव जीता और जीत की हैट्रिक बनाई।

    उत्तराखंड की कमान

    वैसे तो 9 नवंबर वर्ष 2000 को उत्तराखंड राज्य की स्थापना हुई, मगर साल 2012 के विधानसभा चुनावों में रावत का नाम मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे लिया जाने लगा था, परंतु उनकी जगह पर कांग्रेस द्वारा विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री पद दिया गया।

    लेकिन जून 2013 में आई केदारनाथ आपदा से निपटने के लिए राज्य सरकार की नाकामी और गलत फैसलों के आरोपों के चलते विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया और रावत को राज्य की कमान सौंपी गई।

    वैसे तो हरीश रावत तीन बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं किंतु उन्होंने एक भी बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया।