हरीश रावत

| नाम | हरीश रावत (Harish Rawat) |
| जन्मतिथि | 27- अप्रैल- 1948 |
| शिक्षा | बैचलर इन आर्ट्स और एल•एल•बी |
| जन्मस्थान | मोहनरी (अल्मोड़ा) |
1980
1984
1989
1990
1991
1992
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1998
1999
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2002
2009
2014
2017
2019
जीवनी
हरीश रावत उत्तराखण्ड की राजनीति में कद्दावर नेता हैं, जिनका जन्म 26- अप्रैल- 1948 को अल्मोड़ा जिले के छोटे से गांव मोहनरी में हिंदू राजपुत परिवार में हुआ था। हरीश रावत के पिता का नाम राजेंद्र सिंह रावत तथा माता का नाम देवकी देवी था।
हरीश रावत उत्तराखंड की राजनीति में वह अहम नाम है जो अपने आप में ही अपनी साख को दर्शाते हैं। उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के सबसे अहम और सबसे वरिष्ठ चेहरा हैं हरीश रावत। रावत कांग्रेस पार्टी के लिए जितने अहम हैं, वह उतने ही उत्तराखंड की राजनीति के भी अहम किरदार हैं। रावत ने अपने राजनीतिक सफर में लाख कठिनाईयों के बाद भी केंद्र की सरकार में कैबिनेट मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री पद को संभाला है।
शिक्षा
हरीश रावत ने अपनी शिक्षा उत्तर प्रदेश से पूरी करी है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज चौनलिया में करी (वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य का हिस्सा)। इसके बाद हरीश रावत ने अपनी आगे की शिक्षा उत्तरप्रदेश में स्थित लखनऊ यूनिवर्सिटी से पूर्ण की। जहां उन्होंने बी•ए• और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की।
हरीश रावत का शून्य से सफर
अपनी राजनीति की शुरुआत रावत ने शून्य अर्थात ब्लॉक स्तर से चुनाव लडने से की है। इसके बाद हरीश रावत युवा कांग्रेस के दल के साथ जुड़ गए।
छोटे छोटे चुनाव जीतने और हारने के बाद रावत के राजनीतिक करियर में बड़ा बदलाव वर्ष 1980 के दौरान आया जब उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी को अल्मोड़ा लोकसभा सीट से हराया और संसद में अपनी जगह बनाई। इसी वर्ष उन्हें श्रम एवम रोजगार राज्य मंत्री के रूप में भी नियुक्त किया गया। इसके बाद वर्ष1980 से 1989 तक उन्होंने लगातार तीन बार चुनाव जीता और जीत की हैट्रिक बनाई।
उत्तराखंड की कमान
वैसे तो 9 नवंबर वर्ष 2000 को उत्तराखंड राज्य की स्थापना हुई, मगर साल 2012 के विधानसभा चुनावों में रावत का नाम मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे लिया जाने लगा था, परंतु उनकी जगह पर कांग्रेस द्वारा विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री पद दिया गया।
लेकिन जून 2013 में आई केदारनाथ आपदा से निपटने के लिए राज्य सरकार की नाकामी और गलत फैसलों के आरोपों के चलते विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया और रावत को राज्य की कमान सौंपी गई।
वैसे तो हरीश रावत तीन बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं किंतु उन्होंने एक भी बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया।
